हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार राज्य के स्वास्थ्य विभाग में 5,000 से अधिक पद खाली हैं। इनमें डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य तकनीकी व प्रशासनिक पद शामिल हैं। सरकार ने दावा किया है कि इन सभी पदों को एक साल के भीतर भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता दबाव
हरियाणा की बढ़ती आबादी के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। लेकिन पर्याप्त स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। कई जिलों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं।
सरकार का दावा और प्रक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि खाली पदों को भरने के लिए एचएसएससी (हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग) को डिमांड भेज दी गई है और भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सरकार का दावा है कि चरणबद्ध तरीके से भर्ती कर सभी खाली पदों को एक वर्ष में भर लिया जाएगा। इससे अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
विपक्ष का सवाल
विपक्षी दलों ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बार ऐसे दावे किए गए, लेकिन धरातल पर हालात नहीं बदले। विपक्ष का आरोप है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया तेज और पारदर्शी नहीं होगी, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में एसएमओ के 644 पदों में से 219 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार मेडिकल ऑफिसर के 3969 पदों में से 777, सीनियर डेंटल सर्जन के लिए स्वीकृत 56 में से 20, डेंटल सर्जन के 717 में से 58, डेंटल एसिसटेंट के 290 में से 194 पद रिक्त हैं। इसी प्रकार एमपीएचडब्ल्यू के 2734 स्वीकृत पदों में से 597 पद रिक्त हैं। इन पदों को नियमानुसार भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

जनता की उम्मीद
स्वास्थ्य विभाग में इतनी बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरना न सिर्फ कर्मचारियों के लिए रोजगार का अवसर है, बल्कि आम जनता के लिए भी राहत की खबर है। यदि सरकार अपने वादे पर खरी उतरती है, तो आने वाले समय में हरियाणा की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग की यह स्थिति सरकार और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब देखना यह होगा कि एक साल में भर्ती का दावा कितना सफल होता है। यदि समय पर नियुक्तियां होती हैं, तो यह कदम राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

